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क्या आपने नोटबंदी के समय गलत लेन देन किया है? तो आपके बुरे दिन शुरू होते हैं अब

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नोटबंदी भारतीय इतिहास के सबसे जोखिम भरे फैसलों में से एक रहा है।लोगो को उन दो महीनो में काफी तकलीफो का सामना करना पड़ा, और सरकार की भी इस कदम के लिए काफी आलोचना हुई थी। कुछ लोगो ने इस कदम को गलत बताया, कुछ ने कहा की इम्प्लीमेंटेशन सही से नहीं हुआ, कुछ ने सरकार को अमानवीय ही ठहरा दिया.

इस कदम के औचित्य पे हमेशा सवाल उठते रहे, रिज़र्व बैंक के आंकड़ों से यह पता लगा की काफी हद तक करेंसी वापस बैंको में आ गयी. इसके बाद नोटबंदी के आलोचक काफी मुखर हो गए और इस कदम को असफल बताया जाने लगा. सरकार भी चुप रही, लेकिन कुछ तो था जो अंदर ही अंदर घटित हो रहा था।

और आज हम आपको बताएँगे कि सरकार क्यों चुप बैठी थी, और क्यों नोटबंदी के दौरान घोटाले करने वालो के बुरे दिन शुरू होने वाले हैं।

केंद्र सरकार ने बताया कि उसे 13 बैंकों ने नोटबंदी के बाद विभिन्न बैंक खातों से गलत लेनदेन की बेहद महत्वपूर्ण जानकारियां दी हैं। कंपनी मामलों के मंत्रालय ने जानकारी दी कि उसे उन 2 लाख 9 हजार 32 संदिग्ध कंपनियों में से 5,800 कंपनियों के बैंक ट्रांजैक्शन की जानकारी मिल गई है जिनका रजिस्ट्रेशन कैंसल कर दिया गया है। बैंकों ने सरकार को इन कंपनियों के 13,140 अकाउंट्स की जानकारी मुहैया कराई है।

मंत्रालय ने कहा, ‘कुछ कंपनियों ने अपने नाम पर 100 से भी अधिक बैंक अकाउंट्स खुलवा रखे थे। इनमें एक कंपनी के नाम पर तो 2,134 अकाउंट्स पकड़े गए। वहीं, एक अन्य कंपनी के नाम पर 900 जबकि एक और कंपनी के नाम पर 300 अकाउंट्स मिले।’ सरकार ने बताया कि लोन अकाउंट्स को अलग करने के बाद नोटबंदी के दिन यानी 8 नवंबर 2016 तक इन कंपनियों के खातों में महज 22.05 करोड़ रुपये थे जो उस वक्त जमा किए गए थे। बाद में कुछ करोड़ रुपये निकाल लिए गए। सरकार ने कहा कि कंपनियों के नाम पर कई खाते पकड़े गए जिनमें 8 नवंबर 2016 को या तो बेहद कम रकम थी या खाते माइनस में चले गए थे।

हालांकि, 9 नवंबर 2016 के बाद से उन कंपनियों को रद्द किए जाने की तारीख तक कंपनियों ने अपने बैंक खातों में कुल मिलाकर 4,573.87 करोड़ रुपये जमा करवाए और 4,552 करोड़ रुपये निकाल भी लिए। इन कंपनियों के लोन अकाउंट्स की बात करें तो इनका ओपनिंग बैलेंस माइनस में 80.79 करोड़ रुपये है। जैसा कि पहले बताया गया है कि कंपनियों ने नोटबंदी के बाद से अथॉरिटीज को चकमा देने का काम तब तक जारी रखा जब तक कि उनके रजिस्ट्रेशन रद्द नहीं कर दिए गए।

सरकार ने इस बात पर हैरानी जताई है कि कुछ कंपनियों ने तो पाबंदी लगने के बाद भी पैसे जमा करने और निकालने का हौसला दिखाया। उदाहरण के तौर पर एक बैंक में 429 कंपनियों के खातों में 8 नवंबर 2016 तक एक भी पैसा नहीं था। लेकिन बाद में इन खातों के जरिए 11 करोड़ रुपये से ज्यादा जमा और निकासी का काम हुआ और इन खातों के फ्रीज होने के दिन इनसे कुल 42,000 करोड़ रुपये का लेनदेन हो चुका था। एक अन्य बैंक में ऐसी 3000 से ज्यादा कंपनियों के कई-कई खाते पाए गए।

8 नवंबर तक इन खातों से 13 करोड़ रुपये के लेनदेन हुए थे जो पाबंदी के दिन तक बढ़कर 38,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गए। खास बात यह है कि ये आंकड़े उन संदिग्ध कंपनियों के करीब 2.5% के बराबर ही हैं जिनके रजिस्ट्रेशन सरकार ने रद्द किए हैं। इन कंपनियों और उनके सहयोगियों ने पैसा का जो बड़ा खेल खेला है, वह भ्रष्टाचार, काला धन और काली करतूतों की पर्वत श्रृंखला की एक चोटी मात्र है। सरकार ने कहा, ‘जांच एजेंसियों से समयबद्ध तरीके से जरूरी जांच पूरी करने को कहा गया है। देश और देश के ईमानदार नागरिक ज्यादा साफ-सुथरे भविष्य की कल्पना कर सकते हैं।’

गौरतलब है कि नोटबंदी के बाद फर्जी लेनदेन करने वाली कंपनियों पर मोदी सरकार ने शिकंजा कसा। इसके तहत, जीएसटी लागू होने से 48 घंटे पहले 1 लाख शेल कंपनियों पर ताला जड़ने की बात खुद पीएम मोदी ने कही थी। साथ ही इन कंपनियों के डायरेक्टरों पर भी फंदा कसते हुए उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया।

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