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टैक्स चोरों का पता लगाने के लिए होगा ‘बिग डेटा’ का इस्तेमाल

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नोटबंदी के चलते बैंकों में बड़े करेंसी नोट जमा कराने वाले ईमानदार करदाताओं में ब्लैक मनी छिपाने वालों को छांटने और फिर उनको निशाना बनाने के लिए इनकम टैक्स डिपार्टमेंट बिग डेटा का इस्तेमाल करने जा रहा है। यह बात मामले की जानकारी रखने वाले दो सूत्रों ने बताई है।

बिग डेटा ऐनालिटिक्स टूल टोटल इनकम टैक्स डेटा चेक करके अनियमितता के बारे में बताएगा। इसके आधार पर टैक्स अधिकारी 31 दिसंबर के बाद लोगों को नोटिस भेज सकेंगे।

बिग डेटा टूल्स इंडिविजुअल्स के टैक्स रिटर्न, कुछ लोगों के मालिकाना हक वाली कंपनियों के चुकाए टैक्स के डेटा का मिलान इंडिविजुअल्स की तरफ से बैंक में जमा कराई गई रकम का बैंकों से जुटाए गए दूसरे डेटा से करेंगे। एक सूत्र ने बताया, ‘टैक्स अधिकारियों के लिए बैंकों से मिले हर डेटा को चेक करना और उसका मिलान दूसरे टैक्स डेटा से करना व्यावहारिक तौर पर नामुमकिन है।

ऐनालिटिक्स का इस्तेमाल अनियमितताओं का पता लगाने में किया जाता है। बाद में अनुभवी टैक्स ऑफिधिकारी उनकी स्क्रूटनी करते हैं।’ टैक्स पेमेंट बेहतर बनाने के लिए सरकार ने इसी साल मई में टैक्स ऐनालिटिक्स का इस्तेमाल करना शुरू किया था। अब उम्मीद की जा रही है कि टैक्स डिपार्टमेंट कॉर्पोरेट टैक्स और पर्सनल टैक्स के डेटा जुटाकर उनका मिलना करेगा। सरकार ने कॉर्पोरेट टैक्स रिपोर्टिंग के कुछ मामलों में बिग डेटा का इस्तेमाल तो किया है लेकिन वह पहली बार पर्सनल टैक्स के लिए बहुत बड़े पैमाने पर उसका यूज करने जा रही है।

मामले की जानकारी रखने वाले दूसरे सूत्र ने कहा, ‘ऐनालि‌टिक्स टूल से सिर्फ यही पता नहीं चलेगा कि किसी इंडिविजुअल ने बैंकों में कितना पैसा जमा कराया है। इससे यह भी जानकारी मिलेगी कि उसने पहले के वर्षों में कितना इनकम टैक्स चुकाया था।

यह भी पता चलेगा कि उसकी कंपनी ने कितना कॉर्पोरेट टैक्स चुकाया था और क्या उसका कोई एंप्लॉयी है और क्या उन्होंने हाल में बैंक में पैसा जमा किया है। आप व्यवहारिक तौर पर इंडिविजुअल की टैक्स हिस्ट्री का हर डिटेल पता कर सकते हैं।’

सरकार सिर्फ संदिग्ध बैंक डिपॉजिट को निशाना बनाने की योजना बना रही है। पिछले महीने आयकर अधिनियम की धारा 115BBE में संशोधन वाला बिल पास किया था। उसमें कैश डिपॉजिट, अघोषित आय या निवेश पर 60 प्रतिशत टैक्स लगाने का प्रस्ताव है। लोकसभा में सरकार के दिए प्रजेंटेशन के मुताबिक नया टैक्स लॉ 1 अप्रैल से लागू होगा। 17 नवंबर को सबसे पहले इकनॉमिक टाइम्स ने खबर दी थी कि सरकार बैंक अकाउंट्स में ब्लैक मनी जमा कराने वालों पर लगभग 50 से 70 प्रतिशत टैक्स लगा सकती है।

इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि आयकर अधिनियम में प्रस्तावित संशोधन में यह जिक्र नहीं है कि इसके दायरे में कब तक के मामले आएंगे। ऐसे में टैक्स अधिकारी हर उस शख्स से सवाल जवाब कर सकते हैं जिन्होंने 1 अप्रैल 2016 के बाद से अपने खातों में पैसा जमा कराया होगा।

 

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