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मोदी सरकार ने निकाला तेल के लिए सऊदी पे हमारी निर्भरता का तोड़, मान गए मोदी जी !!

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भारत अपने जरूरत का काफी बड़ा हिस्से का तेल दूसरे देशो से आयात करता है, जिसमे भी खाड़ी देशो का सबसे बड़ा शेयर रहता है. और खाड़ी देशो में भी किसी देश कि बात कि जाये तो वो हैं सऊदी अरब. सऊदी अरब भारत को सबसे ज्यादा तेल निर्यात करता है. भारत हमेशा से ही तेल के लिए दूसरे देशो पे निर्भर रहा है, क्यूकी हम अपनी जरूरत के मुताबिक तेल नहीं निकाल पाते.

लेकिन इस क्षेत्र में दूसरे देशो पर निर्भरता कई बार देश के हितो के लिए घातक सिद्ध होती है. कई बार तेल को ही दूसरे देशो पे दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. तेल उत्पादन करने वाले देशो का एक सगठन है ओपेक, यह संगठन कई बार तेल को एक हथियार कि तरह इस्तेमाल कर चुका है. यह देश अपने राजनीतिक फायदे के लिए तेल का मूल्य कम ज्यादा करते हैं, जिससे दूसरे देशो पर काफी दबाव हमेशा ही बना रहता है

मोदी सरकार के बनने के बाद से ही इस क्षेत्र में काम होना शुरू हुआ और सरकार ने तेल कि आपूर्ति के लिए दूसरे देशो कि तरफ देखना शुरू किया. इस समस्या के हल के लिए अब भारत ने अमेरिका से हाथ मिला लिया है. भारत अगले कुछ महीनों में अमेरिका के कच्चे तेल का महत्वपूर्ण बाजार बनने जा रहा है।

इस सिलसिले में भारत की रिफाइनरियां जांच-पड़ताल के अमेरिका से कच्चा तेल मंगवा रही हैं ताकि आयात के लिए किसी एक देश या क्षेत्र पर निर्भरता कम की जा सके। हाल में अमेरिका का तेल निर्यात साप्ताहिक रेकॉर्ड बना लिया। इस दौरान उसने हर दिन 20 लाख बैरल कच्चा तेल दूसरे देशों को भेजे, लेकिन भारत को तेल निर्यात न के बराबर रही है।

हालत यह है कि 2015 में क्रूड ऑइल के निर्यात पर प्रतिबंध हटने के बाद से भारत को कुछ ही खेप मिली। लेकिन, अब भारतीय रिफाइनरियों ने अमेरिका से ज्यादा मात्रा में तेल मंगवाना शुरू कर दिया। दरअसल, भारत मध्य पूर्व के देशों के अलावा अन्य देशों से तेल आपूर्ति बढ़ाना चाहता है। रिफाइनरियों में अमेरिका के दोनों तरह के कच्चे तेल की टेस्टिंग हो रही है।

किसी नई जगह से क्रूड ऑइल मंगवाने पर ऐसी टेस्टिंग होती ही है।अमेरिकी शहर ह्युस्टन के एक ऑइल ब्रोकर ने कहा, ‘इनमें से कई (भारतीय रिफाइनरीज) यह देखना चाहते हैं कि क्या वे इसका संचालन कर सकते हैं। वे अमेरिकी क्रूड को परखना चाहते हैं।’ व्यापारियों एवं दलालों का कहना है कि विदेशी रिफाइनरियों ने अमेरिकी क्रूड बेंचमार्क के मुकाबले फिजिकल ग्रेड्स के लिए ऊंची बोलियां लगाईं। इनमें भारत में मौजूदगी वाली विदेशी रिफाइनरियां भी शामिल हैं।

जून महीने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की मुलाकात में भारत को एनर्जी एक्सपोर्ट्स पर बातचीत हुई थी। मोदी सरकार तब से ढुलाई की शर्तें हटाते हुए ज्यादा मात्रा में कच्चे तेल की आयात को बढ़ावा दे रही है। भारतीय रिफाइनरियों इंडियन ऑइल कॉर्प, भारत पेट्रोलियम कॉर्प और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लि. को जहाजरानी मंत्रालय से मार्च महीने तक अमेरिका से तेल आयात करने की विशेष अनुमति मिली है।

न्यू यॉर्क की कंपनी अगेन कैपिटल एलएलसी के पार्टनर जॉन किल्डफ ने कहा, ‘वे (रिफाइनरियां) बड़ी आयातक बनने जा रही हैं। वे मिडल ईस्ट पर निर्भरता कम करना चाहती हैं।’ भारत की सरकारी कंपनी हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्प लि. के एक एग्जिक्युटिव ने अगस्त महीने में कहा था कि कंपनी इसका आकलन कर रही है कि क्या अमेरिकी क्रूड नाइजीरियाई बैरल्स की जगह ले सकता है। हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने सितंबर महीने में अमेरिकी तेल की पहली बार खरीद की थी। आइकॉन शिपिंग डेटा के मुताबिक, इसी महीने 20 लाख बैरल तेल से भरा सुपर टैंकर भारत पहुंचा जबकि 30 लाख बैरल की दो खेप नवंबर में पहुंचनी है।

इससे पहले अमेरिका से कच्चा तेल भारत नहीं के बराबर ही आता था। यूएस ईआईए के जुलाई तक के आंकड़े बताते हैं कि इस साल सिर्फ फरवरी में ही अमेरिका से कच्चा तेल भारत आया था। अगस्त में इंडियन ऑइल कॉर्पोरेशन ने 9 लाख 50 हजार बैरल ईगल फोर्ड शेल ऑइल खरीदा था जबकि इतनी ही मात्रा में मार्स क्रूड ऑइल की डिलिवरी अक्टूबर के अंत में हुई थी। अक्टूबर महीने में कंपनी ने यूएस साउदर्न ग्रीन कैनियन (एसजीसी) और डब्ल्यूटीआई मिडलैंड क्रूड से 10-10 लाख बैरल तेल खरीदा था। इसी महीने दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनिंग कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लि. ने मिडलैंड से 10 लाख बैरल तेल खरीदा और नवंबर में ईगल फोर्ड से इतनी ही मात्रा में तेल की डिलिवरी होनेवाली है।

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