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ऑपरेशन ऑल आउट । एक विजयगाथा

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कश्मीर दशकों से सुलग रहा था… कितनी सरकार आयी गयी हुयी पर इसका समाधान नही निकाल पा रही थी… पाकिस्तान को युद्ध में मिली शिकस्त से वो और मजबूती से उभरा और आतंकवाद को उसने बड़ा। हथियार बनाते हुए भारत और लगाता हमले जारी रखे ..हजारी सैनिक और कश्मीरी लोग इन हमलों में मारे गए,हताहत हुए और कश्मीर से पलायन कर गए …ऐसा लगा जैसे एक पूरी संस्कृति खत्म हो गयी कश्मीर से।

2014 के बाद जब केंद्र में सरकार बदली और मोदी नेतृत्व की भाजपा सरकार से देश की बागडोर सम्भाली तब भी आतंकवाद का निपटारा करना उनकी वरीयता सूची में था लेकिन उससे भी पहले हमारे नष्ट भृष्ट हो चुके खुफिया तंत्र को पुनः विकसित करना ,सभी सुरक्षा बलों को भारतीय थलसेना के साथ संलग्न करना एक बड़ी चुनौती थी .. औरउँ सबसे बड़ी चुनौती थी कश्मीरी अवाम में सरकार व् लोकतंत का विस्वास पुनः कायम करना …जो एक हफ्ते दस दिनों का काम नही होता है।

कश्मीर से आतंकवाद को खत्म करना के लिए अब तक के सबसे बेहतरीन और उच्च कोटि के सैन्य ऑपरेशन किये गए जिनमे पिछले वर्ष पाक अधिकृत कश्मीर में आतंकवादी ठिकानों पर की गयी भीषण सैन्य कार्यवाई “सर्ज़िकल स्ट्राइक” प्रमुख है कि गयी परन्तु इतना सब होने के बावजूद भी आतंकी कब्जे में नही आ रहे थे..तो सेना ने LOC और अंतर्राष्ट्रीय सीमा को लगभग साल किया जिससे आतंकवादी देश में प्रवेश न कर सके और थलसेना ने अपने बेहतरीन कमांडो के साथ ने CRPF और जम्मू और कश्मीर पुलिस की स्पेशल टीमो को शामिल किया और एक ऑपरेशन लांच किया जिसका नाम था “ऑपरेशन आल आउट” जिसमे ख़ुफ़िया तंत्र व् स्थानीय गुप्तचरों से प्राप्त सूचनाओं और मिलिट्री इंटेलिजेंस के आंकड़ों पर आधारित ऑपरेशन शुरू किये गए…. रोज़ कश्मीर व् देश अखबारों,मीडिया और सोशल मीडिया आदि में आतंकवादियो के मारे जाने की खबरे प्रमुखता से प्रकाशित होने लगी।

हिज्बुल मुजाहिद्दीन,लश्कर ए तैयबा जैसे अन्य बड़े आतंकी संगठनों को जड़ से खत्म करने के लिए सारी रक्षा मशीनरी को एक साथ एक लक्ष्य पर आरोपित कर ऑपरेशन ऑल आउट का शुभारंभ किया गया परिणाम स्वरूप अब तक 12 प्रमुख कमांडरों सहित 150 से ज्यादा आतंकवादी घाटी में विभिन्न सैन्य अभियानों में मारे जा चुके है ।

क्या हुआ कश्मीर मे पिछले दशकों में

कश्मीर में।विकास के नाम पर मोटेतौर पर सिर्फ युवाओं का आतंकवादी बनना ही उल्लेखनीय है …आतंकवादियो द्वारा जबरदस्ती या धार्मिक मतान्धता व् उन्माद के नाम पर अपरिपक्व बच्चो को जेहाद और आतंकवाद की ट्रेनिंग में धकेला जाने लगा था पर हाल ही में आतंकी संगठनों के टॉप कमांडरो के मारे से युवाओं मे एक खौफ फ़ैल गया है और वो इस जिहाद में आतंकवादियो से विमुख भी होने लगे है फलस्वरूप आतंकवादियो को युवाओं को गुमराह कर आतंकी बनाने के इस धंधे पर करारी चोट हुई है।
सुरक्षा बलों ने आतंकवादियो को हथियार सहित आत्मसमर्पण करने की अपील की है।

जम्मू कश्मीर पुलिस के महानिदेशक मुनीर खान के अनुसार – हिज्बुल मुजाहिद्दीन और लश्कर के शीर्ष कमांडरों को इन सैन्य अभियानों में निशाना बनाया गया जिससे ये संगठन चरमरा गये है । शीर्ष आतंकवादियो को मारने के पीछे की रणनीति का खुलासा करते हुए उन्होंने कहा कि ये कमांडर युवा कश्मीरियो को आतंकी बनने का लालच देते है जैसे आतंकी बनने पर 20-40,000 मासिक सैलेरी,एनकाउंटर में मारे जाने पर आतंकी परिवार को बड़ी राशि व् अन्य सुविधाएं आदि इनके प्रोग्राम का हिस्सा है ।
हम स्थानीय आतंकवादियो को समर्पण करने के लिए लगातार अपील कर रहे है,अगर वो अपने हथियारों के साथ मुठभेड़ के दौरान आत्मसमर्पण करते है तो हम उसका स्वागत करेंगे,हम उनके उचित पुर्नवास का आश्वासन देते है । “कश्मीर में रोजगार के नगण्य अवसर उपलब्ध होने के कारण व् धार्मिक मतान्धता का पूरा फायदा इन आतंकी संगठनों ने अब तक उठाया है”

“अन्य सैन्य अधिकारियों (नाम उजागर नही करूंगा) के अनुसार – हमारे द्वारा CASO ऑपरेशन करने से आतंकी घटनाओं व् आतंकवादियो की संख्या में बड़ी कमी आयी है..पर नए आतंकियों की भर्ती होना अभी भी हमारे लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है”

इस साल आतंकवादियो के समर्पण करने की दर व् संख्या का खुलासा इयन जरूरी नही है जितना की उस व्यक्ति का पुनर्वास कितना जिसने आत्मसमर्पण किया है .. ये कुछ ऐसे मुद्दे है जिन्हें हम मीडिया के सामने उजागर नही कर सकते है – ज़ुल्फ़िकार हसन (IG CRPF)

27 अक्टूबर 1947 ,जब सेना को कश्मीर में आतंकियों के विरूद्ध उतारा गया था , इस दिन को जैश-ए-मोहम्मद संगठन की एक बड़ी आतंकी घटना को अंजाम देने की प्लानिंग के बारे पुलिस से पूछताछ की गयी की उनके पास इससे सम्बंधित कोई जानकारी है तो पुलिस अधिकारियों ने कहा कि  गुलमर्ग,कश्मीर मे आतंकी संगठनों को मिली कमांडर जाकिर मूसा की रिपोर्ट की जांच कर बयान देंगे अभी 27 अक्टूबर दूर है।

भारतीय थलसेना के लेफ्टिनेंट जनरल http://जी.एस”>जी.एस. संधू ( GOC,15 Core,Srinagar) ने कहा कि पिछले दिनों जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादी 27 अक्टूबर को भारतीय सेना पर एक बड़े हमले की योजना  बना रहे है- । श्रीनगर के आस पास के इलाको में और दक्षिण कश्मीर में।आतंकवादी घुसपैठ क्र रहे है जिनके कॉटन सुरक्षबलों के हथियार चीन जाने की घटनाएं हुई है,हम उन्हें ट्रैक कर रहे है .. हाल ही किये गए एक ऑपरेशन 3 आतंकी और 2 ऑन ग्राउंड वर्कर गिरफ्तार किये गए।

ऐसी छिटपुट घटनाएं अभी और चलती रहेंगी इस बीच NIA ने कश्मीरी अलगाववादी नेताओं को गिरफ्तार कर नजरबन्द किया है जिससे इन घटनाओं में काफी कमी देखी गयी है .ये नेता पत्थरबाजो,हुड़दंगियों व् आतंकियों को पैसा व् रसद मुहैया कराते थे इनके पाकिस्तान से सीधे सम्बन्ध भी है।

पिछले दिनों अन्य घटनाओं में जैसे बैंक डकैती,हथियार छीने जाने जैसी घटनाओं में हिज्बुल और जैस के आतंकियों की CCTV फुटेज से पहचान की गयी है । कश्मीर के विभिन्न क्षेत्रों से आतंकवादियो को एनकाउंटर में मारा जाना या गिरफ्तार किया जाना अब सुरक्षा बलों का दैनिक जीवन का हिस्सा हो गया है और हम आशा करते है कि शीघ्र ही कश्मीर में शान्ति होगी । जय हिंद । जय हिंद के सेना

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