Home Social Media

रवीश कुमार की ‘सेक्युलर’ पत्रकारिता का पोस्टमॉर्टम

SHARE

हाल ही में आपने देखा कि कैसे बिकाऊ मीडिया केंद्र सरकार को झूठे आरोपों में फंसाकर एक षड्यंत्र कर रही है , जी हां जय अमित शाह पर लगे बेबुनियाद आरोपों की बात कर रहा हूँ जिसके आधार पर मीडिया का एक बिकाऊ धड़ा पूरी मोदी सरकार को घेर रहा है ठीक गुजरात चुनाव के पहले !

ऐसा पहली बार नहीं हुआ है , आपको याद होगा कि कैसे तेजपाल (तहलका) ने तात्कालिक भाजपा अध्यक्ष बंगारू लक्ष्मण को साजिश के तहत भ्रस्टाचार में फंसाया था जिसके कारण सीधे साधे बंगारू लक्ष्मण को पद छोड़ना पड़ा था !!

तो आइए रवीश कुमार और NDTV के अधूरे सच का पोस्टमॉर्टम करते हैं , समझते हैं कि किस तरह रवीश दुर्भावना से तथ्यों को घुमाकर और अधूरे तथ्यों से सरकार के खिलाफ दुष्प्रचार करते हैं वह भी एक षड्यंत्र के तहत !!

1. अभी कुछ दिनों से आप प्राइम टाइम पर देख रहे होंगे कि कैसे रवीश कुमार हमारी उच्च शिक्षा प्रणाली की बदहाली दिखाकर सरकार के खिलाफ दुष्प्रचार कर रहे हैं , में यह नहीं कहता कि सरकार बिल्कुल भी जिम्मेदार नहीं है या समस्या नहीं है , परंतु जिस तरह से रवीश अपनी रिपोर्ट में अधूरे तथ्य पेश करते हैं वह षड्यंत्रकारी है !

रवीश ने बताया कि किस तरह उच्च शिक्षा संस्थानों में प्राध्यापकों की कमी है , किस तरह से अतिथि शिक्षकों के दंम पर कई संस्थान चल रहे हैं जंहा अतिथि शिक्षक कई सालों से बदहाली और बहुत कम वेतन में काम कर रहे हैं , आगे रवीश कुमार बताते हैं कि सरकार ने तो अतिथि शिक्षकों को नियमित कर रही है ना नई नियुक्तियां , कैसे नेट  परीक्षा पास करने के वावजूद शिक्षकों की भर्ती नहीं हो पा रही है , कुल मिलाके इस समस्या का पूरा ठीकरा रवीश तात्कालिक केंद्र सरकार के ऊपर फोड़ देते हैं पर यह नहीं बताते कि सरकार जब नियुक्तियां करना शुरू करती है तो इन्ही अतिथि शिक्षकों में से कोई जिसकी आयु सीमा निकल चुकी है वह जाकर हाई कोर्ट से जाकर स्टे ले आता है और नियुक्तियां या नियमतिकरण पर विराम लग जाता है !

रवीश कुमार आपको यह नहीं बताते कि उच्च शिक्षा विभाग कई संस्थानों को वार्निंग लेटर तक जारी कर चुका है कि यदि नियुक्तियां या नियमतिकरण नहीं हुआ तो संस्थान की मान्यता रद्द की जा सकती है !!क्योंकि अगर रवीश कुमार पूरी बात बताएंगे तो सरकार को बदनाम कैसे कर पाएंगे !!

2. अभी कल के प्राइम टाइम में रवीश कुमार “द वायर” की वकालत करते देखे गए रवीश का कहना है कि 100 करोड़ का मानहानि केस करना मीडिया को धमकी देने जैसा है ताकि कोई सरकार के विरोध में न बोल सके , आगे रवीश कुमार कहते हैं कि यह ताज्जुब करने वाली बात है कि जय अमित शाह का केस एक सरकारी वकील लड़ेगा !!मगर रवीश कुमार यह नहीं बताते कि अगर द वायर की रिपोर्ट सही है तो वह सरकार से लड़ने के लिए डोनेशन क्यों मांग रहे हैं !!

3. रवीश कुमार बिना समय गंवाए  , बिना जांच पूरी हुए JNU के 9 फरवरी के वीडियो को फ़र्ज़ी बता देते हैं , कन्हैया को मासूम बता देते हैं पर जब वही वीडियो लैब में सही पाए जाते हैं माफी तक नहीं मांगते वल्कि अपना प्रोपगंडा जारी रखते हैं !!

4. NDTV और रवीश ADR के आंकड़ों के आधार पर घोषणा कर देते हैं कि सबसे ज्यादा दागी बिधायक और सांसद भाजपा के हैं , मगर आपको यह नहीं बताते क़ि भाजपा के सांसद बिधायक की कुल संख्या सबसे ज्यादा है करीब हजार के आसपास जबकि दूसरी बड़ी पार्टी (कांग्रेस) के कुल सांसद और बिधायक 150 हैं …..ऐसे में दागियों की संख्या भाजपा में होना लाजमी है !! आपको रबिष यह नहीं बताते कि %(अनुपात) के हिसाब से भाजपा   सबसे साफ पार्टी है !

5. नोटबंदी के समय बिना समय गंवाए इसे फैल बता देते हैं ,अपने चुनिंदा पैनल से इसे फैल सिद्ध कर देते हैं !! आपको लाइन में जान गंवाने वालों की संख्या 144 बता देते हैं पर यह नहीं बताते कि अधिकतर की मौत हृदयघात या बीमारी के कारण हुई !! एक पिता अपनी बेटी की शादी में दहेज के पैसे न प्रबंध कर पाने की दशा में आत्महत्या कर लेता है और हमारे उच्च कोटि के पत्रकार रवीश इसे नोटबंदी से जोड़ देते हैं !

6. GST को फैल बताते हुए आपको रवीश कुछ चुनिंदा पैनल के निराधार तथ्यों से समझाने की कोशिश तो करते हैं परंतु ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री , फ़िल्म इंडस्ट्री , कृषि यंत्र की रिकॉर्ड वृद्धि को छुपा जाते हैं !

7. यूपी चुनाव के दौरान मायावती की रैली कवरेज करने जाते हैं और जब दलित महिलाएं मुफ्त एलपीजी कनेक्शन वाली उज्जवला योजना की तारीफ कर देती हैं तो तुरंत सवाल बदल देते हैं !

8. रोहिंग्या मुस्लिमों की इंडो बांग्ला बॉर्डर पर दयनीय स्थिति दिखाते हैं , उनकी वकालत करते हैं पर रहाइन में हिन्दूओं पर इन्ही रोहिंग्या मुस्लिमों के द्वारा किये गए कत्लेआम को छुपा जाते हैं !!

9. स्वघोषित ईमानदार पत्तरकार रवीश कुमार अन्य मीडिया हाउस को बिना समय गंवाए “हिन्दू- मुस्लिम”का अखाड़ा बनाने बाला घोषित कर देते हैं पर प्रणय रॉय के मनी लॉन्ड्रिंग मामले पर चुप्पी साध लेते हैं ….उल्टे सरकार को तानाशाह बता देते हैं !!

10. लंकेश की हत्या पर कर्नाटक सरकार के वजाय केंद्र पर हमला करते हैं , 1779 लोग हैं जिनको मोदी फॉलो करते हैं उनमें से एक व्यक्ति लंकेश को कुतिया कहता है तो उस एक ट्विटर एकाउंट को फॉलो करने के लिए मोदी पर अपशब्दों की बौछार कर देते हैं रवीश कुमार और अपनी पैनल में उन लोगों के साथ चर्चा करते हैं जो स्मृति ईरानी को न जाने कितने अभद्र शब्द बोल चुका है ! जबकि इनके पसंदीदा नेता केजरीवाल स्वयं सबसे बड़े अभद्र हैं , जबकि इन्ही रवीश कुमार के कई फेसबुक पेज पर आए दिन गाली गलौच की जाती है प्रधानमंत्री के लिए !!

लिखने को बहुत कुछ है पर इसी एक प्रश्न के साथ बात समाप्त करना चाहूंगा कि पूरे बिहार में घूम घूम कर लोगों की जात पूछने वाले रबिष कुमार कभी राहुल गांधी से उसका धर्म, गोत्र और जात पूछने की हिम्मत दिखाएंगे?

Author : Sunil Saxena

loading...
Loading...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here