Home Politics

अब सुप्रीम कोर्ट ने दिया EVM विवाद पर कांग्रेस को जबरदस्त झटका, राहुल गाँधी गैंग में मचा हाहाकार

SHARE

आगामी 18 दिसंबर को गुजरात और हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनावों के नतीजे घोषित किए जाएंगे. एग्जिट पोल में दोनों ही राज्यों में बीजेपी की सरकार बनते हुए दिखाया गया है. नतीजों से पहले चुनावों में ईवीएम और वीवीपैट को लेकर कांग्रेस ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. कांग्रेस ने अर्जी के जरिये न्‍‍‍‍यायालय से मांग की कि 25 फीसदी वीवीपैट वोटों का मिलान ईवीएम केे वोटों सेे किया जाए ताकि चुनाव में निष्पक्षता को सभी के सामने लाया जा सके. सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को सुनवाई के दौरान रद्द कर दिया. कोर्ट ने कहा कि गुजरात कांग्रेस को चुनाव में सुधार की मांग करते हुए नए सिरेे से याचिका दायर करनी चाहिए.

दरअसल, कांग्रेस गुजरात चुनावों में चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर पहले ही सवाल उठा चुकी है. गुजरात के दूसरे और अंतिम चरण के मतदान के दौरान कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि चुनाव आयोग प्रधानमंत्री के निजी सचिव की तरह काम कर रहा है. साथ ही पार्टी ने कई जगहों पर ईवीएम को ब्लूटूथ से जुड़ने की शिकायत भी आयोग में दर्ज कराई थी.

शुक्रवार को कांग्रेस द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में मांग की गई कि कोर्ट चुनाव आयोग को आदेश दे कि गुजरात चुनावों की मतगणना के दौरान ईवीएम के 25 फीसदी वोटों का मिलान VVPAT से किया जाए, ताकि मशीनों की सत्यता प्रमाणित हो सके. कांग्रेस की ओर से सीनियर वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने पक्ष रखा.

बता दें कि इस बार चुनाव आयोग ने गुजरात चुनाव में सभी मतदान केंद्रों पर वीवीपैट मशीनों का इस्तेमाल किया गया था. इस मशीन में वोट डालने के बाद पर्ची भी निकलती है जिससे मतदाता को पता चलता है कि उसने जो वोट डाला है, वह सही निशान को गया है या नहीं. गुजरात चुनाव से पहले यूपी चुनाव में भी कांग्रेस समेत कई दलों ने ईवीएम के इस्तेमाल पर सवाल खड़े किए थे. पार्टियों द्वारा चुनौती दिए जाने पर चुनाव आयोग ने ईवीएम हैकाथॉन का आयोजन किया था, लेकिन इस दिन आरोप लगाने वाली कोई भी पार्टी मौके पर नहीं पहुंची.

आपको बता दें कि ईवीएम को लेकर उठ रहे सवालों के मद्देनजर ही गुजरात में चुनाव में इस्तेमाल की गईं सभी EVMs को VVPAT मशीनों से जोड़ा गया था। इस मशीन के जरिए मतदाता को यह सुनिश्चित करवाया जाता है कि उसने EVM पर जिस प्रत्याशी को वोट दिया है, वास्तव में वोट उसी को गया है। मशीन के डिस्प्ले उसी प्रत्याशी के नाम की पर्ची नजर आती है और फिर वह पर्ची मशीन में रह जाती है। गड़बड़ी की आशंका में इन पर्चियों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

Loading...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here